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dà hóng gān

dà hóng gān · 大红柑

गान पु चा (柑普茶, *gān pǔ chá*) एगो चीनी मिलजुल चाय सभ के परिवार हवे जहाँ सिन्हुई काउंटी के सुखावल संतरा के छिलका खमीर उठल पुएर चाय खातिर बर्तन के रूप में इस्तेमाल होला। बड़हन लाल संतरा — दा होंग गान (大

गान पु चा (柑普茶, gān pǔ chá) एगो चीनी मिलजुल चाय सभ के परिवार हवे जहाँ सिन्हुई काउंटी के सुखावल संतरा के छिलका खमीर उठल पुएर चाय खातिर बर्तन के रूप में इस्तेमाल होला। बड़हन लाल संतरा — दा होंग गान (大红柑, dà hóng gān) — पछिला पतझड़ के, पूरा तरीका से पाकल फल के प्रतिनिधित्व करे ला जेवन एह परिवार में सभसे नरम आ मीठ प्रोफाइल देला। दा होंग गान गान पु चा के स्पेक्ट्रम में सभसे संतुलित बिंदु बनल बा — जहाँ पाकल सिन्हुई साइट्रस पाकल पुएर के माटी जइसन गहिराई से मिलेला।

1. बर्गीकरण आ उत्पत्ति:

  • किसिम: मिलजुल चाय (पूरा संतरा के छिलका जे पुएर से भराइल होखे)।
  • श्रेणी: गान पु चा (柑普茶, gān pǔ chá); ढेर पाकल किसिम — दा होंग गान (大红柑, dà hóng gān)।
  • उत्पत्ति: सिन्हुई काउंटी (新会, Xīn huì), जे पच्छिमी गुआंगडोंग के मोती नदी डेल्टा में जियांगमेन (江门, Jiāng mén) शहरी क्षेत्र के हिस्सा हवे।
  • छिलका खातिर कच्चा माल: सिन्हुई चेन पी (新会陈皮, Xīn huì chén pí) — पुरान सुखावल संतरा के छिलका जेवन चीन में एके साथ मसाला, पारंपरिक उत्पाद आ संग्रह के बस्तु के रूप में बहुमूल्य मानल जाला। चीन में सिन्हुई चेन पी के भौगोलिक संकेत उत्पाद के रूप में संरक्षित बा; ई मानल जाला कि काउंटी से बाहर उपजावल फल से निकलल छिलका अलग, कम मूल्यवान गुणवत्ता वाला होखेला।

2. इतिहास आ सांस्कृतिक महत्व:

  • गुआंगडोंग में सिन्हुई चेन पी के परंपरा कई सदी पुरान बा आ ई कैंटोनीज खाना आ “गरम” मौसमी उत्पाद सभ के लोक धारणा से गहिराई से जुड़ल बा।
  • पूरा संतरा के छिलका में चाय भर के बनावे के विचार अपेक्षाकृत हाल के पाककला-चाय नवाचार हवे, जेकरा के आधुनिक जमाना में ब्यापक परसार आ व्यावसायिक उत्थान पुएर में सामान्य रूचि के परिणाम के रूप में मिलल।
  • 2010 के दशक में, गान पु चा, आ खासकर कॉम्पैक्ट जिआओ चिंग गान, चीनी चाय बजार के एगो सभसे प्रमुख प्रवृत्ति बन गइल: सुबिधाजनक “एक परोस — एक फल” फॉर्मेट, पहिचाने जोग सुगंध, आ पुरान चेन पी से जुड़ाव एह चाय के एगो लोकप्रिय उपहार आ रोजमर्रा के पेय बना दिहलस।
  • एह संदर्भ में दा होंग गान, तीखा साइट्रस वाली कसैलापन के जगह शांत मिठास पसंद करे वाला लोग खातिर अउरी “क्लासिक”, नरम आ परिपक्व उत्पाद के विशेष स्थान रखेला।

3. बनस्पति बिबरण आ कच्चा माल:

  • किसिम/कल्टीवार: जा झी गान (茶枝柑, chá zhī gān) — संतरा (Citrus reticulata) के एगो स्थानीय किसिम, जेकरा के सिन्हुई गान के नाव से भी जानल जाला।
  • ई संतरा भा साधारण मीठ संतरा नइखे: फल मुख्य रूप से गूदा खातिर ना बलुक ओकर छिलका खातिर उपजावल जाला, जवना में गूदा तुलनात्मक रूप से खट्टा आ बीया से भराइल होखेला।
  • जा झी गान के छिलका में तेल ग्रंथि के साफ दानेदारपन, सुगंधित यौगिक सभ के उच्च अनुपात, आ पुरान होखे पर सालन दर साल जटिल सुगंध बिकसित करे के क्षमता होखेला। गुणन के इहे मिलन इ किसिम के चेन पी के रूप में लंबा समय ले पुरान होखे खातिर — आ एही से पुएर खातिर आदर्श बर्तन — उपयुक्त बनावेला।

4. टेरोइर आ खेती के खास बिसेसता:

  • एह जगह के भू-बनस्पति बिसेसता ताजा नदी के पानी आ खारा समुंद्री ज्वार के मिलन से निर्धारित होखेला, ठीक ओह जगह जहाँ सी जियांग आ तान जियांग नदी मिलेलिन।
  • इहाँ के माटी गाद-जलोढ़, थोड़िका खारा, आ खनिज जमाव से भरपूर होखेला।
  • भरपूर बरखा वाला गरम आ नम उपोष्णकटिबंधीय मानसून जलवायु स्थानीय संतरा में बिसेस रूप से पातर, तेलीय, आ सुगंधित छिलका बनावेला जवना में आवश्यक तेल के मात्रा ढेर होखेला।

5. उत्पादन के तकनीक:

दा होंग गान के निर्माण दू अलग-अलग कारीगरी — साइट्रस के छिलका के प्रसंस्करण आ पुएर के तइयारी — के जोड़ेला।

  • फल के पाकल अवस्था। फल के तूरे के समय तइयार चाय के सारा ऑर्गनोलेप्टिक बिसेसता सभ के निर्धारित करेला, आ सिन्हुई में छिलका के पाकल होखे के तीन गो मुख्य चरण बतावल गइल बा:
    • चिंग गान / जिआओ चिंग गान (青柑 / 小青柑, qīng gān / xiǎo qīng gān) — जल्दी तूरल काँचा-हरियर संतरा (लगभग गर्मी के अंत से पतझड़ के सुरुआत ले)। छिलका गहिरा हरियर, पातर, तीखा, बेधक, लगभग कपूर-साइट्रस जइसन सुगंध आ साफ कसैलापन लिहले। जिआओ चिंग गान छोट-छोट “बॉल” फल हवे जे हाल के दशक में खास लोकप्रिय भइल बा।
    • एर होंग गान (二红柑, èr hóng gān) — बीचा के पाकल अवस्था के संतरा, ओह समय तूरल जाला जब छिलका हरियर से भूअर-संतरिया रंग में बदले लागेला। प्रोफाइल ताजगी आ मिठास के बीच संतुलन राखेला।
    • दा होंग गान (大红柑, dà hóng gān) — पछिला, ब्यवहारिक रूप से जाड़ा के तुड़ाई के बड़ फल, जब छिलका पूरा तरीका से लाल हो के संतरिया-लाल रंग के हो जाला। हरियर संतरा के तुलना में एह में आवश्यक तेल कम होला, जबकि चीनी के मात्रा ढेर होला; सुगंध नरम पड़ जाला, तीखापन खो के गोल साइट्रस मिठास हासिल करेला। दा होंग गान के पारंपरिक रूप से गान पु चा के सभसे “पीये लायक” आ कोमल रूप मानल जाला, जवना में जवान हरियर छिलका के आक्रामक कड़वाहट ना होखे।
  • फल के तइयारी। पाकल संतरा के डंठल के लगे “ढक्कन” सावधानी से काटल जाला आ एही छेद से गूदा निकाल के पूरा खोखला छिलका के खोल छोड़ दिहल जाला। ई काम हाथ से होला ताकि देवाल खराब न होखे।
  • चाय से भराई। खोखला छिलका के ढीली पत्ती चाय से कस के भरल जाला। ढेर मामिला में ई पाकल पुएर शु (熟普, shú pǔ) होला — कृत्रिम त्वरित किण्वन (渥堆, wò duī) के उत्पाद, जेकर माटी जइसन, कोमल, बेरुखाई रहित प्रोफाइल मीठ साइट्रस से बढ़ियाँ मेल खाला। कबो-कबो काँचो पुएर शेंग (生普, shēng pǔ) से भराई भी देखे के मिलेला। काटल गइल “ढक्कन” के वापस ओहिजे लगा दिहल जाला।
  • सुखाई। भरल फल सभ के सूखल अवस्था में ले आइल जाला। दू गो मुख्य तरीका लागू कइल जाला: प्राकृतिक धूप में सुखाई (生晒, shēng shài), जेकरा जानकार लोग सभसे उम्दा मानेला काहे कि ई अस्थिर सुगंध आ पुरान होखे के क्षमता के बेहतर तरीका से सुरक्षित राखेला, आ कम तापमान पर सुखाई भा हल्का भूनाई, जे प्रक्रिया के तेज करेला आ स्थिरता सुनिश्चित करेला। मिलल-जुलल तरीका भी मिलेला।
  • परिणाम स्वरूप, चाय आ छिलका सुखाई आ बाद के भंडारण के दौरान धीरे-धीरे सुगंधित पदार्थ सभ के आदान-प्रदान करेलिन: छिलका के जरूरी तेल चाय के पत्ती सभ के संतृप्त करेला, आ चाय साइट्रस के मिठास के सोख लेला।

6. ऑर्गनोलेप्टिक बिसेसता:

  • दा होंग गान के अर्क एगो कोमल, गरम, गोल-मीठ प्रोफाइल देला: पाकल पुएर माटी जइसन, नम लकड़ी आ गहिरा शीरा के हल्का नोट ले आवेला, जबकि पाकल छिलका बेधक कड़वाहट रहित, जिआओ चिंग गान के बिसेसता, संतरा-संतरिया मिठास ले आवेला।
  • तरल आमतौर पर गहिरा लाल-भूअर रंग के, गाढ़ आ चिकन होखेला।

9. चाय बनावल:

  • चाय बनावे खातिर गाइवान भा छोट माटी के चायदानी के सुबिधाजनक फॉर्मेट हवे।
  • पूरा फल के या त फोरल जा सकेला भा बेध के एइसे बनावल जा सकेला, जरूरत अनुसार छिलका के टुकड़ा डाल के।
  • लगभग 95 – 100 °C के गरम पानी के सिफारिश कइल जाला: ढेर तापमान पुएर के माटी जइसन गहिराई आ छिलका के जरूरी तेल दुनु के खोले में मदद करेला।
  • पहिला जोर अक्सर धोवे खातिर इस्तेमाल होला; बाद के जोर छोट रखल जाला, समय के धीरे-धीरे बढ़ावत जाला। बढ़िया गुणवत्ता वाला दा होंग गान कई गो जोर झेल सकेला, साइट्रस आ चाय के बीच संतुलन के आराम से बदल देला।

10. भंडारण:

  • एह उत्पाद से जुड़ल मुख्य विचार हवे छिलका के पुरान होखल। सिन्हुई में स्थापित परंपरा के अनुसार, संतरिया के छिलका के चेन पी (陈皮, “पुरान छिलका”) तभी कहल जा सकेला जब एकरा के लंबा समय ले रखल गइल होखे — आमतौर पर स्वीकार बेंचमार्क कम से कम तीन साल के अवधि बा। नया, हाल में सुखावल छिलका के बस गान पी (柑皮, gān pí) कहल जाला आ एकर मूल्य कम होखेला।
  • तइयार गान पु चा भी पुरान होत जाला: समय के साथ रूखापन दूर हो जाला, सुगंध गहिर, गरम, आ अउरी एकीकृत हो जाला। एही कारण दा होंग गान आ गान पु चा के अन्य रूप अक्सर ओही तरीका से रखल आ एकट्ठा कइल जाला जइसे खुद पुएर के राखल जाला।
  • हिआँ जानबूझ के GB/T के बिसेस राष्ट्रीय मानक संख्या नइखे दिहल गइल काहे कि उनका खातिर केहू सत्यापित स्रोत मौजूद नइखे; पाठक के चाहीं कि ऊ “सिन्हुई चेन पी” भौगोलिक संकेत लेबलिंग आ कच्चा माल के उत्पत्ति के जानकारी पर ध्यान देस।

11. दाम आ नकली सामान:

दा होंग गान के चयन करे आ एकर असलियत परखे के दौरान, कुछ बिसेसता सभ के मार्गदर्शन उपयोगी होखेला।

  • छिलका के उत्पत्ति। असली मूल्य सिन्हुई जा झी गान से जुड़ल बा; दूसर इलाका सभ के छिलका कम बारीक आ कम “तेलीय” सुगंध देवेला।
  • रंग आ पाकल अवस्था। असली दा होंग गान पूरा लाल भइल संतरिया-लाल छिलका वाला एगो बड़ फल हवे; हरियर रंग पहिलहीं चिंग गान भा जिआओ चिंग गान के ओर इशारा करेला।
  • छिलका के बनावट। रोशनी में आ छुअन पर, बढ़िया छिलका पर घन तेल ग्रंथि साफ लउकेला; सुगंध एकदम साइट्रस वाली होखे के चाहीं, बासी भा फफूंदी के गंध से रहित।
  • सुखाई के तरीका। धूप में सुखावल (生晒) के गर्मी से सुखावल गइल से ढेर मूल्यवान मानल जाला; ए बारे में आमतौर पर ईमानदार उत्पादक बतावेला।
  • भीतर के चाय के गुणवत्ता। खाली बाहरी आवरण पर ना बलुक पुएर-भराई पर भी ध्यान देवे के चाहीं: माटी जइसन, साफ-सुथर, बे “गोदामी” गंध वाला पाकल पुएर एगो नीक उत्पाद के निशानी हवे।
  • उमिर। जेतना लंबा पुरान होखे, सुगंध ओते नरम आ जटिल होखेला; उमिर के दावा के असली गंध आ स्वाद से मिलान के देखल सार्थक होला, ना कि आँख मूंद के मान लिहल जाव।