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jiē yáng chǎo chá
jiē yáng chǎo chá · 揭阳炒茶
Jieyang chao cha (揭阳炒茶, Jiēyáng chǎo chá) एगो हरियर चाय हवे जे पैन-भुजल प्रकार के हवे (炒青, chǎoqīng), ई पूरबी गुआंगडोंग (广东, Guǎngdōng) के शहरी जिला जिएयांग (揭阳, Jiēyáng) के पहाड़ी इलाका सभ में बने ला
Jieyang chao cha (揭阳炒茶, Jiēyáng chǎo chá) एगो हरियर चाय हवे जे पैन-भुजल प्रकार के हवे (炒青, chǎoqīng), ई पूरबी गुआंगडोंग (广东, Guǎngdōng) के शहरी जिला जिएयांग (揭阳, Jiēyáng) के पहाड़ी इलाका सभ में बने ला, इतिहासी-सांस्कृतिक चाओशान (潮汕, Cháoshàn) क्षेत्र में। नाँव के शाब्दिक अरथ हवे “भुजल चाय” आ ई प्रसंस्करण के एगो खास बिसेसता के ओर इशारा करे ला: पत्ती के स्थिरीकरण आ सुखवाई तवा पर कइल जाला। समुंदर किनारे के चाओशान के परसिद्ध ऊलोंग चाय सभ के बिपरीत, ई चाय मुख्य रूप से अंदरूनी जिला सभ के हक्का (客家, Kèjiā) परबती समुदाय सभ से जुड़ल बा आ ई बहुत हद तक लोकल, रोजमर्रा के उपभोग के उपज बनल बा। एकर कदर एकरी साफ भुजल-चेस्टनट सुगंध, गाढ़ रस आ सस्ता दाम खातिर कइल जाला। जिएयांग चाओ चा के परसिद्धि राष्ट्रीय ना बलुक बेसी क्षेत्रीय स्तर के बा।
1. वर्गीकरण आ उत्पत्ती:
- प्रकार: हरियर चाय (绿茶, lǜ chá), पैन-भुजल हरियर चाय के उपश्रेणी (炒青绿茶, chǎoqīng lǜ chá).
- उत्पत्ती: शहरी जिला जिएयांग (揭阳, Jiēyáng), पूरबी गुआंगडोंग (广东, Guǎngdōng), चाओशान क्षेत्र (潮汕, Cháoshàn).
- मुख्य कच्चा माल के इलाका: सभसे पहिले पहाड़ी जिला जिएशी (揭西, Jiēxī), आ साथे में शहरी-स्तरीय जिला पुनिंग (普宁, Pǔníng); मैदानी इलाका रोंगचेंग (榕城, Róngchéng) आ जिएदोंग (揭东, Jiēdōng) इतिहासी रूप से दूसर खेती के चीजन खातिर उन्मुख रहल।
- इलाका के अनुमानित निर्देशांक: लगभग 22.9–23.8° उ. अ. आ 115.6–116.6° पू. दे.
शब्द 炒茶 (chǎo chá) स्थानीय बोलचाल में ठीक ओह घरेलू या छोट पैमाना के हरियर चाय के बतावे ला जवन तवा पर भुजल जाला, ऊलोंग चाय सभ के बिपरीत, जिनहन के एह क्षेत्र में बेसी करके बिसेस किसिम के नाँव से बोलावल जाला। “जिएयांग चाओ चा” नाँव के तहत कौनों सख्त एकरूप ब्यापारिक मानक ब्यापक चलन में नइखे, एह से एह नाँव के तहत कौनों सख्त परमाणित ब्रांड के बजाय एगो लोकल शैली समझल जाला।
2. इतिहास आ सांस्कृतिक महत्व:
पूरबी गुआंगडोंग सांस्कृतिक रूप से एक समान नइखे। समुंदर किनारे के निचला इलाका सभ में चाओशानी (तेओचेव) परंपरा के लोग रहे ला, जिनहन खातिर मुख्य पेय ऊलोंग हवे, सभसे पहिले फेंगहुआंग डानकोंग (凤凰单丛, Fènghuáng dāncóng), जेकरा गोंगफू-चा (工夫茶, gōngfu chá) शैली में बनावल जाला। अंदरूनी पहाड़ी जिला सभ में, जवना में जिएशी भी सामिल बा, आबादी के एगो बड़हन हिस्सा हक्का (客家, Kèjiā) लोग हवे, जिनहन में इतिहासी रूप से एगो अलगे आदत जड़ जमा चुकल बा – पैन-भुजल हरियर चाय पिये के।
जिएयांग चाओ चा एही हक्का-परंपरा से आवे ला। पहाड़ी परिवारन खातिर अइसन चाय अपने या पड़ोस के बनावल रोजमर्रा के पेय रहे: पत्ती पहाड़ी ढलान पर झाड़ी से तूरल जात रहे, लकड़ी के चूल्हा पर कच्चा लोहा के कड़ाही में भुुजल जात रहे आ रोज पिये खातिर रखल जात रहे। अइसन चाय बिधिबद्ध दरजा के दावा ना करे आ ना इ “बड़का नाँव वाली” चाय सभ के घेरा में आवे, बलुक रोजमर्रा के जिनगी के एगो मजबूत हिस्सा बनल रहे। इ बँटवारा – समुंदर किनारे के तेओचेव लोगन में ऊलोंग आ पहाड़ी हक्का लोगन में भुजल हरियर चाय – पूरबी गुआंगडोंग के चाय भूगोल के एगो आजो लउके वाला बिसेसता बा।
3. बनस्पति बिबरन आ कच्चा माल:
- पौधा के प्रजाति: चाय के झाड़ी (茶, chá), Camellia sinensis, मुख्य रूप से छोट आ मझोला पत्ती वाली झाड़ीदार किसिम।
- किसिम: स्थानीय बीअवंस आबादी (群体种, qúntǐzhǒng), आ साथे में गुआंगडोंग में हरियर चाय उत्पादन खातिर ले आइल गइल कल्टीवार। खाली हरियर चाय खातिर, ऊलोंग खातिर बेसिका उन्मुख किसिम सभ के इस्तेमाल आमतौर पर ना कइल जाला।
- कच्चा माल: बेसी बढ़िया बैच खातिर एगो-दू गो पत्ती आ कोंपल वाला अंकुर; रोजमर्रा के चाय खातिर एकरा से मोट सामान भी चल जाला – कोंपल के साथे दू-तीन गो पत्ती।
- सीजन: मुख्य बसंत के तुड़ाई के बेसी कीमत दिहल जाला; गर्मी आ पतझड़ के तुड़ाई से बेसी सादा आ कसैला चाय मिले ला।
कच्चा माल के महीनपन सीधे अंतिम परभाव डाले ला: जल्दी बसंत के पत्ती से बेसी मुलायम आ सुगंधित रस मिले ला, जबकि बेसी बिकसित पत्ती वाला पिछली तुड़ाई कसैलापन आ खुरदुरापन के ओर झुकल रहे ला।
4. टेरुआर आ खेती के बिसेसता:
- जलवायु: उपोष्णकटिबंधीय मानसूनी, गर्म उमस भरल गर्मी आ हल्का जाड़ा, भरपूर बरखा के साथे।
- उच्चावच: जिला के पच्छिमी हिस्सा के पहाड़ी आ निचला पहाड़ी मासिफ; जिएशी में डाबेइशान (大北山, Dàběishān) परबत मासिफ बा जेकर चोटी एक हजार मीटर से बेसी ऊँच बा।
- चाय बगान के ऊँचाई: मुख्य रूप से कई सौ मीटर आ एकरे से बेसी; बेसी ऊँच आ कोहरा वाला भूखंड से बेसी सुगंधित कच्चा माल मिले ला।
- माटी: पहाड़ी ढलान के लाल- आ पीयरमाटी, आमतौर पर अम्लीय आ बढ़िया जलनिकास वाली।
बार-बार कोहरा, दिन आ रात के तापमान में अंतर आ पहाड़ी ढलान पर बिखराएल रोशनी पत्ती में सुगंधित आ नाइट्रोजनी यौगिक सभ के जमा होखे में मदद करे ला। एही खातिर सभसे दिलचस्प बैच बेसी ऊँचाई वाला, बादल से छाए वाला भूखंड से आवे ला, ना कि मैदान से।
5. उत्पादन के तकनीक:
जिएयांग चाओ चा पैन-भुजल हरियर चाय के क्लासिक योजना अनुसार बने ला, जहाँ तापीय प्रसंस्करण मुख्य रूप से तवा पर कइल जाला।
- सुखवाई आ नमी हटवाई (摊青, tānqīng): ताजा पत्ती के पातर परत में फइला दिहल जाला ताकि सतह के नमी हट जाय आ पत्ती हल्का मुलायम हो जाय।
- हरियरियाहट के स्थिरीकरण (杀青, shāqīng): पत्ती के तवा पर गरम कइल जाला, एंजाइम सभ के निष्क्रिय क के ऑक्सीकरण रोक दिहल जाला; इ चरण चाय के हरियर चरित्र तय करे ला।
- मरोड़ (揉捻, róuniǎn): मुलायम भइल गरम पत्ती के मरोड़ल जाला, कोशिका सभ के हिस्सा के नष्ट क के बाहरी रूप दिहल जाला।
- भुजलाई सुखवाई (炒干, chǎogān): शैली खातिर सभसे महत्वपूर्ण चरण – बार-बार सुखवाई आ तवा पर नियंत्रित आँच पर भुजलाई। ठीक एहिजे बिसेस भुजल-चेस्टनट सुर बने ला।
अंतिम चरण में तवा पर उच्च तापमान प्रसंस्करण कैरामेलाइजेशन आ मैयार प्रतिक्रिया सभ के शुरू करे ला, जिनहन के उत्पाद (जवना में पाइराजाइन भी सामिल बा) भुजल अनाज आ चेस्टनट के पहिचानल जाए वाला सुर देला। भुजलाई के मात्रा अंतिम परभाव पर साफ असर डाले ला: मध्यम भुजलाई से ताजगी बचल रहे ला, बेसी गहिरा भुजलाई से “भुजल” सुर बढ़ जाला, बाकिर पतली बारीकी सभ के छुपा सके ला।
6. ऑर्गेनोलेप्टिक बिसेसता:
- सूखल पत्ती: गहिरा हरियर से हरियर-धूसर रंगत ले, मरोड़ल या हल्का मुड़ल; बेसी मोट बैच में पत्ती बड़हन आ गहिरा होखे ला।
- रस: पीयरहूँ-हरियर या हरियर-पीयर, बेसी भुजल बैच में – सोनहर रंगत के साथे।
- सुगंध: भुजल-चेस्टनट (板栗香, bǎnlì xiāng), भुजल अनाज के सुर के साथे (炒豆香, chǎodòu xiāng); ताजा “हरियर” हिस्सा भाप वाली हरियर चाय सभ से कम्मे ब्यक्त होखे ला।
- स्वाद: गाढ़, भरपूर, ध्यान देवे लायक कसैलापन आ बाद में आवे वाला मीठ गुण के साथे (回甘, huígān); मोट तुड़ाई में कसैलापन तेज होखे ला।
7. रासायनिक संरचना:
नीचे हरियर चाय खातिर बिसेस सीमा सभ दिहल गइल बा, जवना में जिएयांग चाओ चा भी आवे ला; सही मान कच्चा माल आ प्रसंस्करण पर निर्भर करे ला।
- पॉलीफेनॉल (茶多酚, cháduōfēn): अनुमानित रूप से सूखल द्रब्यमान के 18–36%.
- कैटेचिन (儿茶素, érchásù): पॉलीफेनॉल सभ के मुख्य हिस्सा, जवना में EGCG भी सामिल बा।
- कैफीन (咖啡碱, kāfēijiǎn): लगभग 2–4%.
- अमीनो अम्ल (氨基酸, ānjīsuān): लगभग 1–4%, प्रमुख घटक – थियेनाइन (茶氨酸, cháānsuān).
- सुगंध बनावे वाला यौगिक: पत्ती के प्राकृतिक वाष्पशील पदार्थन के अलावा, तवा पर भुजलाई के दौरान तापीय प्रतिक्रिया सभ के उत्पाद बिसेस भुजल सुर देला।
पॉलीफेनॉल आ अमीनो अम्ल के अनुपात बहुत हद तक कसैलापन आ मुलायमियत के संतुलन तय करे ला: अमीनो अम्ल के हिस्सा जेतना बेसी होखे (जे छायादार भूखंड से जल्दी बसंत के कच्चा माल खातिर बिसेस रूप से होखे ला), रस ओतने ढेर भरपूर आ मुलायम होखे ला।
8. फायदेमंद गुण:
- एंटीऑक्सीडेंट सक्रियता: कैटेचिन सभ के बेसी मात्रा के कारण, जे हरियर चाय सभ खातिर बिसेस बा।
- स्फूर्तिदायक परभाव: थियेनाइन के साथे मिल के कैफीन बिना कड़काहट के हल्का टॉनिक काम करे ला।
- ताजगी के एहसास: परंपरा अनुसार अइसन चाय गरम उमस वाला जलवायु में पियास बुझावे खातिर पियल जाले।
दिहल गइल गुण हरियर चाय के बारे में आम बिचार सभ के देखावत बाड़ें आ चिकित्सकीय सिफारिश ना हवें। कैफीन के मात्रा के कारण साँझ के पिये आ बेसी संवेदनशीलता पर मात्रा के बारे में सावधानी बरतल जरूरी बा।
9. बनावे के तरीका:
- पानी: नरम, ताजा उबालल आ हल्का ठंडा कइल।
- तापमान: अनुमानित रूप से 80–90 °C; पतला बसंत बैच खातिर निचला सीमा लगे, बेसी भुजल आ मोट बैच खातिर – ऊपरी सीमा लगे।
- बर्तन: रोजमर्रा पिये खातिर काँच के गिलास (玻璃杯, bōlíbēi) या पोर्सिलिन के गाइवान (盖碗, gàiwǎn); क्षेत्र में गोंगफू-दृष्टिकोण भी ब्यापक बा।
गिलास से पिये खातिर सुबिधाजनक बा लगभग 2–3 ग्राम 200 मिलीलीटर पर ले के, पानी डाल के रस घटत जाए पर दोबारा डालत रहल जाय। लगभग 110 मिलीलीटर के मात्रा वाला गाइवान खातिर लगभग 3–5 ग्राम ले के छोट प्रवाह बनावल जाला: पहिला – 10–20 सेकंड, आगे समय के क्रमिक बढ़ती के साथे। तगड़ा भुजल पत्ती एक के बाद एक कई गो प्रवाह सह ले ला; तापमान आ पत्ती के मात्रा के बेसी क दिहला से कसैलापन बढ़ जाला। पहिला तेज धोवे वाला प्रवाह जरूरी नइखे, बाकिर बेसी मोट कच्चा माल खातिर जायज बा।
10. भंडारण:
- दसा: ठंडा, सूखल, अँधेर वाला जगह, बाहरी गंध से दूर।
- बर्तन: हवाबंद ना लउके वाला डिब्बा, टीन के डिब्बा या फॉइल लगावल परत वाला पैकेट।
- समय: दूसर हरियर चाय सभ नियन, उत्पादन के बाद पहिला महिना में सभसे बढ़िया; ताजगी आ सुगंध समय के साथे कमजोर होखत जाले।
लमहर भंडारण खातिर कस के बंद डिब्बा में फ्रिज के इस्तेमाल संभव बा, बाकिर निकालत घरी जरूरी बा कि डिब्बा के खोले के बिना चाय के कमरा के तापमान ले गरम होखे दिहल जाय ताकि संघनन से बचाव हो सके। हरियर चाय नमी, रोशनी आ गंध के परति संवेदनशील होखे ला, एह से मसाला आ कॉफी के साथे पड़ोस से बचल जरूरी बा।
11. दाम आ नकली सामान:
- दाम के स्तर: एगो लोकल रोजमर्रा के हरियर चाय के रूप में, जिएयांग चाओ चा बहुमत में महँग नइखे; बेसी दाम खाली पहाड़ी भूखंड से जल्दी बसंत के तुड़ाई खातिर जायज बा।
- बाजार के हकीकत: चाय मुख्य रूप से लोकल उपभोग खातिर उन्मुख बा आ राष्ट्रीय प्रीमियम बाजार पर कम्मे मिले ला, एह से एकर दाम सट्टा के उछाल के बहुत कम शिकार होखे ला।
चूँकि इ श्रेणी सस्ती आ कमजोर ब्रांड वाली बा, एकदम महँग नकली सामान इहाँ कम्मे बा; बेसीकर दूसर दर्जा के मिलावट मिले ला। सचेत करे वाला चीज होखे के चाहीं:
- स्थानीय नाँव के तहत बेसी सस्ता बाहरी हरियर चाय के साथे मिलावट;
- पुरान, ताजगी खो चुकल चाय के नया फसल के नाँव से बेचल – एकर ओर इशारा करे ला सूखल पत्ती के फीका रंग, धुँधलाल रस आ “धूरि भरल” गंध;
- बहुत भारी भुजलाई, जवना से मोट कच्चा माल छुपावल जाला;
- साफ तौर पर कृत्रिम सुगंधित पदार्थ, जे अप्राकृतिक रूप से चिपकल “इत्र नियर” सुर देला।
बेसी बिस्वासजोग बा ऑर्गेनोलेप्टिक पर निर्भर रहल: जिंदा भुजल-चेस्टनट सुगंध, पारदर्शी हरियर-पीयर रस आ बिना बासीपन के साफ बाद के स्वाद।
12. रोचक तथ्य:
- नाँव शाब्दिक रूप से तकनीक के बरनन करे ला: 炒 (chǎo) – “तवा पर भुुजल”, एह से 炒茶 बिपरीत बा, उदाहरण खातिर, भाप वाली या अलग तरीका से स्थिर कइल हरियर चाय सभ के।
- चाय पूरबी गुआंगडोंग के सांस्कृतिक बँटवारा के देखावे ला: पहाड़ी हक्का परंपरा अनुसार हरियर भुजल चाय पिये ला, जबकि समुंदर किनारे के तेओचेव – गोंगफू-चा शैली में ऊलोंग।
- चाओशान क्षेत्र पूरा तौर पर ऊलोंग आ गोंगफू-चा से जुड़ल बा, एह से स्थानीय हरियर चाय जिला के बाहर तुलनात्मक रूप से कम परसिद्ध बा।
- तवा पर भुजलाई सुखवाई जिएयांग चाओ चा के चीनी पैन-भुजल हरियर चाय सभ के बड़हन परिवार से जोड़े ला, जहाँ ठीक इ ऑपरेशन “भुजल” सुगंध बनावे ला।
आखिर में:
जिएयांग चाओ चा सभसे पहिले एगो जीवंत उदाहरण हवे लोकल चाय परंपरा के, ना कि कौनों जोरदार बाजार नाँव। इ देखावे ला कि ऊलोंग खातिर परसिद्ध क्षेत्र में भी, हरियर चाय पिये के आपन खुद के तरीका बचल रहे ला, जे पहाड़ी हक्का लोगन के संस्कृति में जड़ जमाए बा। एकर गुण हवें – ईमानदार सादगी, पहिचानल जाए वाला भुजल-चेस्टनट रूपरेखा आ दाम, जे रोजमर्रा के मकसद के अनुरूप बा।
एह चाय से परिचय खातिर बुद्धिमानी बा पहाड़ी भूखंड से बसंत के बैच चुने, बहुत गरम पानी से ना बनावे आ सुगंध आ रस के शुद्धता के आँके, ना कि एकरा में महँग नामी हरियर चाय सभ के महीनता खोजे। आपन संदर्भ में समझल जाए पर – पूरबी गुआंगडोंग के एगो क्षेत्रीय, घरेलू भावना वाला पेय के रूप में – जिएयांग चाओ चा सभसे पूरा तरीका से खुल के सामने आवे ला।
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