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júhuā chá

júhuā chá · 菊花茶

हंसराज के चाय चीन के सभसे प्रचलित फूल के काढ़ा में से एगो ह, जेकरा के सूखल गोदहन के फूल (菊花, júhuā) से बनावल जाला। नाम में "चाय" शब्द होखे के बावजूद, ई चाय के झाड़ी Camellia sinensis के पत्ती से बनल प

हंसराज के चाय चीन के सभसे प्रचलित फूल के काढ़ा में से एगो ह, जेकरा के सूखल गोदहन के फूल (菊花, júhuā) से बनावल जाला। नाम में “चाय” शब्द होखे के बावजूद, ई चाय के झाड़ी Camellia sinensis के पत्ती से बनल पेय ना ह, बलुक एगो क्लासिक चाय-बदल ह: चीनी खाद्य नामकरण में अइसन पेय सभ के 代用茶 (dàiyòng chá) — “बदल के चाय” कहल जाला, माने जड़ी-बूटी के काढ़ा जेकरा के चाय के आदत अनुसार बनाके पीयल जाला। मुख्य कच्चा माल कई गो रूप के Chrysanthemum morifolium प्रजाति से आवेला, जेकर खेती झेजियांग, आनहुई, हेनान अउरी अउरी कई जिला सभ में होला। रोजमर्रा के जिनगी में हंसराज के गरमी के मौसम के “ठंढा” पेय के रूप में पीयल जाला, अक्सर गोजी बेरी भा मिसरी डाल के, आ एकरा के शू पुएर चाय में मिलाके 菊普 (jú pǔ) नामक पेय बनावल जाला। बजार में अलग से एगो किसिम “बर्फीला हंसराज” शिंजियांग से आवेला, जइसे कि नीचे बतावल गइल बा, ऊ बनस्पति बिज्ञान के हिसाब से हंसराज बिलकुलो ना ह।

1. वर्गीकरण आ उत्पत्ति:

  • प्रकार: फूल के जड़ी-बूटी वाला काढ़ा, चाय-बदल (代用茶, dàiyòng chá).
  • बनस्पति स्रोत: बगइचा वाला हंसराज Chrysanthemum morifolium (खानदान ऐस्टरेसी, Asteraceae) आ ओकरे करीबी खेती वाला किसिम सभ के फूल।
  • उत्पाद में का नइखे: Camellia sinensis के पत्ती — हंसराज के काढ़ा में असली चाय ना होला।
  • मुख्य इलाका: झेजियांग (टोंगशियांग, 桐乡), आनहुई (हुआंगशान 黄山, चुझोऊ 滁州, बोझोऊ 亳州), हेनान (जियाओजुओ 焦作 / पुरान इलाका हुआइकिंग 怀庆).

उत्पाद के प्रकृति के समझल जरूरी बा। हंसराज के काढ़ा के “चाय” खाली पीये के तरीका के आधार पर कहल जाला, ना कि बनस्पति बिज्ञान के आधार पर: एह में चाय के पौधा ना होला, आ एकर सेहत लाभ, सवाद आ जमीन-खासियत हंसराज से तय होला। चीनी बेवस्था में अइसन पेय सभ के ईमानदारी से अलग श्रेणी 代用茶 (dàiyòng chá) — बनस्पती काढ़ा-बदल में रखल गइल बा। ई कवनो “नकली” चीज ना ह, बलुक एगो स्वतंत्र सदियन पुरान बिधा ह जेकर आपन खेती के तरीका, किसिम के दर्जा आ पकावे के संस्कृति बा।

लैटिन नाँव में शर्त बतावल जरूरी बा: सभसे ढेर मानल जाए वाला रूप Chrysanthemum morifolium बा, हालाँकि कुछ बनस्पति साहित्य में एही प्रजाति के Dendranthema morifolium उपनाँव से भी जानल जाला — ई प्रजाति बाँटे के पुरान बिबाद के परिणाम ह। इहाँ आम चलन में आवे वाला Chrysanthemum morifolium इस्तेमाल कइल गइल बा।

अलग से “बर्फीला हंसराज” के बारे में साफ कहल जरूरी बा: 天山雪菊 (tiānshān xuějú), जेकरा के 昆仑雪菊 (kūnlún xuějú) भी कहल जाला, बनस्पति बिज्ञान के हिसाब से हंसराज ना ह, बलुक रँगे वाला कोरिओप्सिस — Coreopsis tinctoria, ऊहे ऐस्टरेसी खानदान के लेकिन दूसर प्रजाति के पौधा ह, जेकर उत्पत्ति उत्तरी अमेरिका में भइल आ एकर खेती शिंजियांग के ऊँच पहाड़ी इलाका में होला। ई ओही बजार खंड में बेचल जाला, लेकिन ई अलग प्रजाति ह।

2. इतिहास आ सांस्कृतिक महत्व:

  • पुरान समय: चीन में हंसराज के खेती दू हजार साल से ढेर समय से हो रहल बा, सुरुआत में सजावटी आ जड़ी-बूटी के रूप में।
  • तिहुआर: दोहरा नउआं के तिहुआर (重阳节, chóngyáng jié) हंसराज से पारंपरिक रूप से जुड़ल बा — ऊँचाई पर चढ़ाई आ हंसराज के सुरा (菊花酒, júhuā jiǔ).
  • प्रतीक: गुलदाउदी चित्रकला के “चार महान” (四君子, sì jūnzǐ) पौधा सभ में सामिल बा, बेर के फूल, ऑर्किड आ बाँस के संघे, ई दृढ़ता आ शरद ऋतु के प्रतीक ह।

हंसराज से संन्यासी कवी ताओ युआनमिंग (陶渊明) के छबी गहिराई से जुड़ल बा, जे पूरबी बाड़ के लगे फूल के गुणगान कइलें। सजावटी आ “दवा-दारू” के संस्कृति से निकल के हंसराज समय के साथ रोजमर्रा के जिनगी में एगो ताजा करे वाला काढ़ा के रूप में मजबूती से जगह बना लिहलस, जेकरा के साल भर पीयल जाला, लेकिन खासकर गरमी के मौसम में।

3. बनस्पति बिबरण आ कच्चा माल:

  • पौधा: ऐस्टरेसी खानदान के बहुसाला जड़ी-बूटी, सीधा तना आ कटल पत्ती वाला।
  • फूल: डलिया नियर फूल समूह, जहाँ दू किसिम के फूल होला — जीभ नियर (किनारा के, “पाँखुड़ी”) आ नली नियर (बीच के) — पूरा डलिया सूखा के कच्चा माल बनेला।
  • कच्चा माल: सूखल पूरा फूल भा बिन खिलल कली।

बजार में मौजूद बेपार के किसिम सभ के अलग-अलग बूझल जरूरी बा।

  • 胎菊 (tāi jú): “गर्भ-हंसराज” — हांगझोऊ के सफेद हंसराज (杭白菊) के बिना खिलल भा थोड़िके खिलल कली। एकरा के बेहतर, ढेर नरम आ मीठ कच्चा माल मानल जाला जेह में कड़वाहट कम होला।
  • 白菊花 / 杭白菊 (bái júhuā / háng bái jú): सफेद हंसराज, जेकर सबसे नमूना टोंगशियांग (झेजियांग) से आवेला, जेकरा के भौगोलिक चीन्हा (地理标志, dìlǐ biāozhì) के दर्जा हासिल बा।
  • 黄山贡菊 / 贡菊 (huángshān gòngjú / gòngjú): हुआंगशान (आनहुई, पुरान इलाका हुईझोऊ) से “श्रद्धांजलि” हंसराज; सफेद पातर फूल, जे साफ सवाद खातिर बहुमूल्य बा।
  • 金丝黄菊 (jīnsī huángjú): पीयर “सोनहा-धागा” हंसराज, गाढ़ा रंग के काढ़ा वाला।
  • 滁菊 (chú jú), 亳菊 (bó jú), 怀菊 (huái jú): क्रम से चुझोऊ, बोझोऊ (आनहुई) आ हुआइकिंग (हेनान) इलाका से।

ई किसिम “बिसेस हंसराज” के पारंपरिक लिस्ट में आवेलीं। “चार बिसेस” (四大名菊, sì dà míng jú) के क्लासिक लिस्ट में अक्सर 亳菊, 滁菊, 贡菊 आ 杭菊 आवेलीं; जबकि कई गो इलाकाई लिस्ट में 怀菊 (हेनान, जे “चार हुआई बूटी” में भी आवेला) के भी “चार” में गिनल जाला। चार के लिस्ट इतिहासी स्रोत अनुसार बदलत रहेला, एकर धियान रखल जरूरी बा।

आखिर में, 天山雪菊 (tiānshān xuějú) — जइसन ऊपर कहल गइल बा, ई रँगे वाला कोरिओप्सिस (Coreopsis tinctoria) ह, हंसराज ना; एकर अलग से उल्लेख एकर चीन्हल जाए वाला गाढ़ा लाल काढ़ा के वजह से कइल जाला।

4. जमीन-खासियत आ खेती के बिसेसता:

  • टोंगशियांग (झेजियांग): यांग्त्जी नदी डेल्टा के मैदानी, नम जमीन; आदर्श 杭白菊 आ कली 胎菊 के जनमभूमि।
  • हुआंगशान (आनहुई): पहाड़ी इलाका जे पातर सफेद 贡菊 पैदा करेला।
  • शिंजियांग, कुनलुन पहाड़ के तराई: ऊँच पहाड़ी जमीन, जहाँ “बर्फीला हंसराज” कोरिओप्सिस के खेती होला।

हंसराज के तोड़ाई पतझड़ के अंत में होला, आमतौर पर अक्टूबर से नवंबर के बीच, जब फूल-डलिया सभ जरूरी खिलाव तक पहुँच जालीं। 胎菊 के कली खातिर तोड़ाई पहिलहीं, पूरा खिले से पहिले कइल जाला। कच्चा माल के गुणवत्ता किसिम, तोड़ाई के समय आ सूखावे के सफाई पर भूगोल से कम निर्भर ना करेला।

5. उत्पादन के तकनीक:

  • तोड़ाई: हाथ से भा मशीन से फूल आ कली के उपयुक्त अवस्था में तोड़ल।
  • स्थिरीकरण आ सूखाई: कई तरीका — भाप से उपचार के बाद सूखाई (杭白菊 खातिर बिसेस), गरम हवा में सूखाई/मुरझाई (贡菊 खातिर आम), आ छाँह में कोमल सूखाई।
  • छँटाई: आकार, पूर्णता आ रंग के हिसाब से चुनल।

सूखावे के तरीका देखे में आ सवाद पर असर डालेला। भाप से “स्थिरीकरण” आ बाद में सूखावे से हांगझोऊ किसिम के थोड़िक दबल, मटियाल फूल बनेला; गरम हवा में सूखावे से हुआंगशान के 贡菊 के ढेर खिलल रूप बचल रहेला। अलग से गंधक के धुआँ दे के सूखावे (硫磺熏, liúhuáng xūn) के नुकसानदेह तरीका के उल्लेख जरूरी बा: ई कच्चा माल के ब्लीच क के “ताजा” रूप देला, लेकिन तीखा खट्टा गंध छोड़ देला आ अवांछनीय बा — गुणवत्ता वाला उत्पाद बिना गंधक के सूखावल जाला।

6. इंद्री-अनुभव के बिसेसता:

  • काढ़ा: फीका पीयर आ सोनहरा (सफेद आ पीयर हंसराज) से ले के गहिरा एम्बर-लाल (कोरिओप्सिस “बर्फीला हंसराज”) तक।
  • महक: ताजा फूल-घास नियर, कली 胎菊 में — ढेर गोल आ मधुर महक।
  • सवाद: नरम, हल्का मीठ के साथे थोड़िक कड़वाहट, साफ बाद-सवाद।

胎菊 के आमतौर पर सभसे मीठ आ “चिकन” कच्चा माल मानल जाला; 贡菊 के निर्मल फूल-पन खातिर तारीफ होला; पीयर किसिम ढेर गाढ़ा काढ़ा देवेलीं; कोरिओप्सिस गाढ़ा रंग आ मधुर सुर खातिर बिसेस बा।

7. रासायनिक संरचना:

  • फ्लेवोनॉइड्स: ल्यूटिओलिन, एपिजेनिन, अकासेटिन आ एन्हन के ग्लाइकोसाइड — जैव-सक्रिय यौगिक सभ के मुख्य समूह।
  • फिनोलिक एसिड: सभसे पहिले क्लोरोजेनिक एसिड।
  • इथरियल तेल: टेरपीन तत्व (जेह में बोर्निओल, कपूर आ संबंधित पदार्थ सामिल बा), जे महक बनावेलें।

कोरिओप्सिस “बर्फीला हंसराज” के संरचना अलगे होला: एकर गहिरा रंग आ सवाद खातिर एकर आपन फ्लेवोनॉइड-चाल्कोन (बिसेस रूप से मैरेन आ संबंधित यौगिक) जिम्मेदार होलें। सटीक प्रोफाइल किसिम, इलाका आ सूखावे के तरीका पर निर्भर करेला।

8. उपयोगी गुण:

  • चीनी रोजमर्रा परंपरा में जइसन मानल जाला: हंसराज के “ठंढा” पेय सभ में गिनल जाला, एकरा के “गरमी साफ करे” (清热, qīngrè) आ “आँख के चमक” (明目, míngmù) बिचार से जोड़ल जाला; क्लासिक संजोग — गोजी बेरी (枸杞, gǒuqǐ) के संघे।
  • बिज्ञान का पढ़ताल करत बा: हंसराज के फ्लेवोनॉइड्स आ फिनोलिक एसिड के एंटी-ऑक्सीडेंट के रूप में अध्ययन हो रहल बा; मामला प्रयोगशाला आ सुरुआती आँकड़ा के बा, साबित चिकित्सकीय असर के ना।

जरूरी स्पष्टीकरण: हंसराज के काढ़ा एगो खाद्य उत्पाद ह, दवा ना। ई कवनो इलाज के वादा ना करेला, आ खुदरा बजार के सेहत-दावा विश्वकोशीय लेख के दायरा से बाहर बा। सभजानल जानकारी वाला तटस्थ सावधानी में पीये में संतुलन; गर्भावस्था आ दवा लेत घरी सावधानी (पहिले डॉक्टर से सलाह लिहल उपयुक्त होई); आ ऐस्टरेसी खानदान के पौधा से एलर्जी वाला लोगन में संभावित प्रतिक्रिया के उल्लेख कइल जा सकेला। ई सब जानकारी खातिर बा, सुझाव आ खुराक के बिना।

9. पकाई:

  • अनुपात: लगभग 3–5 g कच्चा माल (कुछ गो पूरा फूल भा मुट्ठी भर कली 胎菊) 200–250 ml पानी खातिर।
  • पानी: लगभग 85–95 °C; नरम कली खातिर निचला छोर, घन पूरा फूल आ पीयर किसिम खातिर ऊपरी छोर।
  • बर्तन: काँच के गिलास भा गाइवान — काँच से फूल के खिलत देखल जा सकेला; चायदानी भी चल जाई।
  • समय: पहिला पकाई खातिर 2–4 मिनट, बाद में सवाद अनुसार।
  • दोबारा पकाई: कच्चा माल 2–4 बेर पकावल जा सकेला; कली 胎菊 एक बरोबर आ ढेर देर तक सवाद देवेला।

हंसराज के अक्सर मिसरी (冰糖, bīngtáng) आ गोजी बेरी डाल के पीयल जाला, आ शू पुएर (菊普, jú pǔ) के संघे भी पकावल जाला। काढ़ा ठंढा परोसे पर बढ़िया लागेला: गरमी में ठंढा भा फ्रिज में राखल, ई ताजगी वाला पहलू देखावेला। कोरिओप्सिस “बर्फीला हंसराज” के भी अइसहीं पकावल जाला, लेकिन एकर गहिरा रंग जल्दी उभरेला।

10. भंडारण:

  • शर्त: सूखल, अँधेर जगह, कस के बंद डिब्बा में, बाहरी गंध से दूर।
  • कमजोरी: फूल के कच्चा माल नमी सोखे ला, नमी से डेराए ला, महक जल्दी खो देला आ कीड़ा से खराब होला।

ढेर नमी वाला माहौल में हवाबंद पैकेजिंग इस्तेमाल करल बुद्धिमानी बा; कुछ लोग कस के बंद डिब्बा में फ्रिज में राखेलें। नम भा फीका पड़ल फूल गुणवत्ता खो देलें।

11. दाम आ नकली:

  • थोक दाम के अनुमान: लगभग 160–280 ¥/kg, प्रकार आ दर्जा अनुसार बहुत अंतर (कली 胎菊 आ बढ़िया माल ढेर दाम के, मामूली कच्चा माल सस्ता)। ई एगो अनुमान बा, खुदरा गारंटी ना।
  • असली माल कइसन देखाई देला: प्राकृतिक रंग, ना कि “ब्लीच कइल-चमकदार”; पूरा, टूटत ना फूल; बिना रसायनिक तीखापन के साफ फूल के महक।

बजार के आम समस्या। गंधक के धुआँ से बेस्वाभाविक रूप से हल्का, “ताजा” रूप मिलेला आ खट्टा तीखा गंध रह जाला — पकावे पर अइसन काढ़ा तीखापन लिए सकेला। रंग चढ़ावे के घटना भी देखे के मिलेला, खासकर पीयर किसिम आ कोरिओप्सिस में: अगर पानी बेजोड़ चमक से एकदम रँग जाय आ कच्चा माल “रंग छोड़े”, तब सतर्क होखे के बात बा। कोरिओप्सिस (天山雪菊) — एगो अधिकृत स्वतंत्र उत्पाद बा, लेकिन एकरा के कबो-कबो “हंसराज” बताके बेचल जाला, जबकि ई अलग प्रजाति बा। आखिर में, महँग 胎菊 आ 贡菊 में सस्ता माल मिलावे के चलन बा। चुने खातिर निर्देश — फूल के पूर्णता, प्राकृतिक रंग आ साफ महक।

12. रोचक तथ्य:

  • नाँव 胎菊 माने “गर्भ-हंसराज” — ई पूरा खिले से पहिले तूड़ल कली ह।
  • हंसराज आ शू पुएर के मिलन — 菊普 (jú pǔ) — एगो लोकप्रिय पेय ह जहाँ फूल पुरान चाय के घनापन के नरम करेला।
  • कुनलुन के “बर्फीला हंसराज” — बजार के सभसे उल्लेखनीय मामला ह जब हंसराज के नाँव से बनस्पति बिज्ञान के हिसाब से दूसर पौधा (कोरिओप्सिस) बेचल जाला।
  • हंसराज कुछ अइसने फूल में से एगो ह जे चित्रकला सिद्धांत “चार महान” आ रोजमर्रा के पेय संस्कृति दुनो में जगह बना चुकल बा।

समापन में:

हंसराज के चाय 代用茶 (dàiyòng chá) के एगो नमूना उदाहरण ह: एगो पेय जेकरा चाय नियर पकाके पीयल जाला, लेकिन ई चाय के पत्ती से ना, बलुक हंसराज के सूखल फूल से बनेला। ई एगो स्वतंत्र परंपरा ह जेकर आपन बिसेस इलाका — टोंगशियांग, हुआंगशान, चुझोऊ, बोझोऊ अउरी अन्य, — आपन किसिम-दर्जा नरम कली 胎菊 से ले के पीयर 金丝黄菊 तक, आ पकावे के आपन चीन्हल संस्कृति, जेह में ठंढा परोसल आ गोजी आ पुएर के संघे मिलाके पीयल सामिल बा।

एह बिधा के पूरा सम्मान देत घरी चीज सभ के सही नाँव से बोलावल जरूरी बा: एह उत्पाद में असली चाय ना बा, आ शिंजियांग के “बर्फीला हंसराज” रँगे वाला कोरिओप्सिस बा, हंसराज ना। हंसराज के काढ़ा एगो सुहावन खाद्य पेय बना रहेला, दवा ना, आ सेहत-लाभ के कवनो दावा के आलोचनात्मक रूप से जाँचल जाए के चाहीं। ई समझ कि कप में का बा, पेय के मूल्य बढ़ावेला — एगो अइसन उत्पाद जेकर पीछे असली भूगोल, बनस्पति बिज्ञान आ शिल्प बा।

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