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shí rǔ

shí rǔ · 石乳

शी रू (石乳, Shí rǔ), जेकर अनुवाद "पाथर के दूध" भा "चट्टान के दूध" होला, वूयी परबत श्रेणी के चट्टानी चाय (武夷岩茶, Wǔyí yánchá) परिवार के एगो ऊलोंग चाय ह, जवन "प्रसिद्ध झाड़ी" (名丛, míngcóng) श्रेणी में आवे

शी रू (石乳, Shí rǔ), जेकर अनुवाद “पाथर के दूध” भा “चट्टान के दूध” होला, वूयी परबत श्रेणी के चट्टानी चाय (武夷岩茶, Wǔyí yánchá) परिवार के एगो ऊलोंग चाय ह, जवन “प्रसिद्ध झाड़ी” (名丛, míngcóng) श्रेणी में आवेला। एकर जनमभूमि उत्तरी फ़ुजियान प्रांत (福建, Fújiàn) के वूयी परबत ह, जहाँ अपक्षयित लाल बलुआ पाथर पर पेय के एगो खास खनिज चरित्र बनेला। ई नाम पहिलहीं सोंग राजवंश के चाय साहित्य में दान चाय खातिर मिलेला, जेकरा चलते शी रू ओह गिनल-चुनल किसिमन में से एगो बा जेकर शताब्दियन पुरान नाम के इतिहास दर्ज बा। चट्टानी चाय के आधुनिक संस्कृति में शी रू के एगो अपेक्षाकृत दुर्लभ míngcóng के रूप में सराहल जाला जेमें साफ “चट्टानी बाद के स्वाद” (岩韵, yán yùn) आ पेय के कोमल, “मलाईदार” बनावट होला। आजु ई एगो खास बिसेस किसिम ह, जवन बड़ पैमाना पर मिले वाला रोउगुई आ शुइशियान से काफी कम मिलेला आ संग्रह लायक बिसेस संग्रह के हिस्सा ह।


1. बर्गीकरण आ उत्पत्ति:

  • प्रकार: ऊलोंग (乌龙茶, wūlóng chá), आधा-किण्वित (आंशिक रूप से ऑक्सीकृत) चाय
  • उपश्रेणी: वूयीशान चट्टानी चाय (武夷岩茶, Wǔyí yánchá)
  • बर्ग: “प्रसिद्ध झाड़ी” (名丛, míngcóng)
  • उत्पत्ति: वूयीशान शहर (武夷山市, Wǔyíshān shì), नानपिंग जिला (南平市, Nánpíng shì), फ़ुजियान प्रांत (福建, Fújiàn), जनवादी गणराज्य चीन
  • मानक: GB/T 18745 “地理标志产品 武夷岩茶” — संरक्षित भौगोलिक संकेत वाला उत्पाद “वूयीशान चट्टानी चाय”

वूयीशान चट्टानी चाय भौगोलिक संकेत उत्पाद के रूप में संरक्षित बा, आ उत्पादन मानक एकरा कई गो प्रकार में बाँटेला: दा होंग पाओ (大红袍, Dàhóngpáo), míngcóng (名丛), रोउगुई (肉桂, Ròuguì), शुइशियान (水仙, Shuǐxiān) आ चीचोंग (奇种, qízhǒng). शी रू míngcóng समूह से संबंधित बा — इतिहासी रूप से चुनल गइल बिसेस झाड़ी जेकर आपन नाम होला।

2. इतिहास आ सांस्कृतिक महत्व:

  • इतिहासी नाम: सोंग युग में बेइयुआन के दान चाय सभ में उल्लेख मिलेला
  • आधुनिक स्थिति: परंपरागत míngcóng, छोट मात्रा में उत्पादित

शी रू नाम चीनी चाय शब्दावली के सभसे प्राचीन परत से संबंधित बा। उत्तरी सोंग राजवंश में बेइयुआन (北苑, Běiyuàn, आधुनिक जियानओऊ 建瓯 के क्षेत्र में) के दान (दबावल) चाय सभ में नामित श्रेणीकरण रहे, आ “石乳” बेइयुआन के दान चाय पर लेखन में मिलेला, जेमें “शुआनहे बेइयुआन दान चाय रेकॉर्ड” (宣和北苑贡茶录, Xuānhé Běiyuàn gòngchá lù) सामिल बा। हालाँकि, ई समझल जरूरी बा कि ऊ इतिहासी शी रू दबावल चक्का चाय रहे आ तकनीकी रूप से ऊलोंग ना रहे।

चट्टानी ऊलोंग के तकनीक वूयीशान में बहुत बाद में, मिंग — चिंग काल में बिकसित भइल। युआन राजवंश में वूयीशान के लगे शाही चाय बगीचा (御茶园, yùcháyuán) स्थापित भइल, आ दान चाय उत्पादन के केंद्र धीरे-धीरे बेइयुआन से इहाँ सरक गइल। आधुनिक míngcóng शी रू पुरान नाम के आगे बढ़ावेला आ परंपरागत रूप से स्थानीय बीज आबादी “चाइचा” (菜茶, càichá) से चुनल गइल मानल जाला, जेकरा से बहुत वूयीशान नामित झाड़ी निकसल बाड़ी सऽ। सोंग दान चाय आ वर्तमान झाड़ी के बीच सीधा आनुवंशिक निरंतरता बिस्वसनीय रूप से स्थापित नइखे भइल, एहसे नाम आ सांस्कृतिक परंपरा के निरंतरता के बात कहल बेसी सही होई, ना कि किसिम के।

3. बनस्पति बिबरण आ कच्चा माल:

  • किसिम: वूयीशान आबादी के míngcóng, झाड़ीदार रूप (灌木, guànmù), मझिला पत्ता
  • किसिम के उत्पत्ति: बीज आबादी चाइचा (菜茶, càichá) से परंपरागत चुनाव
  • तोड़ाई के मानक: “खुलल पत्ता पर तोड़ाई” (开面采, kāi miàn cǎi), अंकुर से तीन-चार पत्ता
  • मौसम: बसंत तोड़ाई, आमतौर पर अप्रैल के अंत — मई

हरियर चाय से उलट, जहाँ कोमल कली के महत्व दिहल जाला, चट्टानी ऊलोंग खातिर पहिलहीं खुलल, थोड़ा मोट पत्ता तूड़ल जाला (अंकुर जेकर ऊपरी कली पत्ता में खुल गइल होखे)। अइसन कच्चा माल में बहु बारी घुमा के प्रोसेसिंग आ बाद में भुनाई खातिर पर्याप्त सामग्री होला। एह बिसेस míngcóng के सटीक आकृति-माप के बिबरण बहुत कम प्रकाशित होला, एहसे किसिम के बिबरण में मझिला पाक के समय वाली वूयीशान झाड़ीदार किसिमन के सामान्य रूप पर आधारित होखल बेसी उपयुक्त बा।

4. टेरुआर आ उगाई के बिसेसता:

  • भू-आकृति: दानशिया (丹霞地貌, Dānxiá dìmào) — लाल रंग के बलुआ पाथर आ कॉन्ग्लोमरेट
  • निर्देशांक: लगभग 27.7° उ.अ., 118.0° पू.दे.
  • क्षेत्र बिभाजन: “सच्चा-चट्टानी” (正岩, zhèngyán), “आधा-चट्टानी” (半岩, bànyán) आ “नदी/जलोढ़” (洲茶, zhōuchá)

चट्टानी चाय खातिर सभसे महत्वपूर्ण अवधारणा — टेरुआर। सभसे बढ़िया भूखंड तथाकथित “तीन घाटी आ दू गो जलधारा” (三坑两涧, sān kēng liǎng jiàn) बनावेलें: हुइयुआन-केंग (慧苑坑, Huìyuàn kēng), निउलान-केंग (牛栏坑, Niúlán kēng), दाकेंग-कोऊ (大坑口, Dàkēng kǒu), लिउशियांग-जियान (流香涧, Liúxiāng jiàn) आ वूयुआन-जियान (悟源涧, Wùyuán jiàn)। झाड़ी सकेत चट्टानी घाटियन में उगेलीं जहाँ माटी चट्टान के अपक्षय उत्पाद से भरपूर होला, नमी ढेर होला, आ बार-बार कोहरा आ बिखराइल रोशनी के चलते सीधा धूप कम पड़ेला। इहे स्थितियन के परंपरागत रूप से “चट्टानी बाद के स्वाद” (岩韵, yán yùn) — पेय के खनिज गहराई आ टिकाऊपन — के निर्माण से जोड़ल जाला। zhèngyán क्षेत्र में उगावल शी रू के मूल्य आधा-चट्टानी आ जलोढ़ भूखंड के कच्चा माल से बहुत ढेर होला।

5. उत्पादन तकनीक:

  • तकनीक बर्ग: कोइला पर भुनल परंपरागत वूयीशान ऊलोंग

उत्पादन श्रृंखला में कई गो क्रमिक चरण सामिल बाड़ें:

  • मुरझाई (萎凋, wěidiāo): धूप में मुरझाई (晒青, shàiqīng) आ भीतरे (晾青, liàngqīng) नमी घटावे आ किण्वन शुरू करे खातिर
  • हरियर बनावल (做青, zuòqīng): बारी-बारी से हिलावल (摇青, yáoqīng) आ पत्ता के आराम — प्रमुख चरण जवन पत्ता के किनारे ऑक्सीकरण के स्तर आ सुगंध रूपरेखा तय करेला
  • स्थिरीकरण (杀青, shāqīng): गर्म क के ऑक्सीकरण रोकल
  • बेलाई (揉捻, róuniǎn): बिसेस मरोड़ल पट्टी के आकार दिहल
  • सुरुआती सुखाई (烘焙, hōngbèi): आकार पक्का क के नमी घटावल
  • चुनाई: डांठ आ मोट टुकड़ा के हाथ से चुनल
  • भुनाई (炭焙, tànbèi): अंतिम पकाई, ढेर करे लकड़ी के कोइला पर, कई बेर में

भुनाई के स्तर (焙火, bèihuǒ) बहुत हद तक शी रू के कौनों बिसेस लॉट के शैली तय करेला: हल्का आग (轻火) से, जवन फूल-फल के नोट बचावेला, बिचला (中火) आ ऊँच (足火/高火) तक, जेमें कैरमेल-अखरोट आ खनिज सुर बेसी उभरेलें आ पेय अउरी गाढ़ हो जाला।

6. इंद्रियगत बिसेसता:

  • सूखल पत्ता: मरोड़ल गहिरा-भूरा-हरियर पट्टी पकाई के बिसेस रंगत के साथे
  • सुगंध: खनिज-भुनल, फूल-फल के आधार के साथे आ पहिचानल जाए वाला “मलाईदार” कोमलता, जवन किसिम के नाम के ओर इशारा करेला
  • स्वाद: गाढ़, लपेटे वाला, खनिज गहराई आ संतुलित कसैलापन के साथे
  • पेय: सोना-नारंगी से एम्बर तक, पारदर्शी
  • बाद के स्वाद: लंबा समय तक मीठ वापसी (回甘, huígān) आ लार उत्पादन (生津, shēngjīn)

नाम “पाथर के दूध” मुख्य रूप से पेय के बनावट से जुड़ल बा — गोल, चिकन, थोड़ा तेलियाह। बढ़िया zhèngyán के शी रू में चट्टान के खनिजता आ पेय के कोमल बनावट के बीच संतुलन महसूस होला, आ “चट्टानी बाद के स्वाद” मुँह में घूँट के बाद टिकल रहे वाला खनिज सुर के रूप में परगट होला।

7. रासायनिक संघटन:

  • चाय पॉलीफेनोल (茶多酚, chá duō fēn): अनुमानित 15–25 %, जेकर कुछ हिस्सा भुनाई में बदल जाला
  • कैफीन (咖啡碱, kāfēi jiǎn): लगभग 2–4 %
  • अमीनो एसिड (氨基酸, ānjī suān), जेमें थियानिन (茶氨酸, chá’ān suān) सामिल बा: करीब 2–4 %
  • सुगंधित यौगिक: हरियर बनावे के समय आ खास करे भुनाई में बनेलें

बिसेस मान कच्चा माल, ऑक्सीकरण के डिग्री आ भुनाई के स्तर पर निर्भर करेलें आ किसिम खातिर स्थायी ना होलें। भुनाई मुक्त कैटेचिन सभ के अनुपात घटावेला आ ऊष्मीय अभिक्रिया के नया उत्पाद (जेमें पाइराज़ीन आ अउरी यौगिक सामिल बाड़ें) पैदा करेला जवन सुगंध के “भुनल” आ कैरमेल रंगत बनावेलें। दिहल गइल रेंज के अनुमानित मानल जाए के चाहीं।

8. लाभकारी गुण:

  • स्फूर्ति आ एकाग्रता: कैफीन आ थियानिन के मेल से हल्का टॉनिक असर
  • एंटीऑक्सीडेंट: पॉलीफेनोल में एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि होला
  • खाना के बाद: ऊलोंग परंपरागत रूप से भारी भोजन के बाद हल्कापन के एहसास खातिर पीयल जाला

कौनों भी चाय नियर, शी रू दवाई ना ह आ एकरा चिकित्सकीय गुण बतावल सही नइखे। बढ़िया से भुनल चट्टानी ऊलोंग चीनी रोजमर्रा परंपरा में ताजा हरियर चाय से “बेसी गरम” आ पेट खातिर नरम मानल जालें, हालाँकि ई साबित फार्माकोलॉजी से बेसी ब्यक्तिगत एहसास से जुड़ल बा। कैफीन के मौजूदगी के चलते शाम के समय आ एकरा प्रति बेसी संवेदनशीलता वाला लोगन के संयम बरते के चाहीं।

9. चाय बनावल:

  • बर्तन: गाइवान (盖碗) 100–120 मिली भा यिशिंग माटी के चायदानी (紫砂, zǐshā)
  • मात्रा: लगभग 7–8 ग्राम प्रति 110 मिली (चट्टानी ऊलोंग गाढ़ बनावल जालें)
  • पानी: कोमल, तापमान लगभग 100 °C (उबलत पानी)
  • धुलाई: झटपट, 3–5 सेकंड, मरोड़ल पत्ता खोले खातिर
  • काढ़ा: पहिला 3–4 काढ़ा 10–15 सेकंड खातिर, बाद में समय धीरे-धीरे बढ़ावल जाला

शी रू प्रवाह बिधि (तेजी से काढ़ा उड़ेल के) से बढ़िया से खुलेला: छोट-छोट काढ़ा से पता चलेला कि गुलदस्ता पहिला फूल-खनिज नोट से अउरी मीठ आ गाढ़ नोट तक कइसे बिकसित होला। गाइवान सुगंध के मूल्यांकन खातिर बेसी सुबिधाजनक बा, जबकि यिशिंग माटी स्वाद के नरम आ गोल करेला। zhèngyán के बढ़िया चाय 8–10 भा ओकरा से ढेर काढ़ा तक टिकेला, आखिर में बिना खालीपन के कोमल मिठास देवेला। उबलत पानी इहाँ बेहतर बा: ई खनिजता आ पकाई के “आग” के पूरा तरीका से बाहरे खींचेला।

10. भंडारण:

  • शर्त: सूखापन, ठंडक, बाहरी गंध आ रोशनी से दूर
  • पैकेजिंग: हवाबंद, मसाला, कॉफी आ सुगंधित उत्पादन से दूर
  • भुनाई के बाद आराम (退火, tuìhuǒ): ताजा भुनल चाय के कई हफ्ता भा महीना “शांत” होखे दिहल जाला

भुनल चट्टानी ऊलोंग, जेमें शी रू सामिल बा, अइसन चाय हईं जे पुरान होखे पर बिकसित हो सकेलीं। भुनाई के तुरंत बाद सुगंध में “आग” हावी होला, आ पेय खातिर फायदेमंद बा कि कुछ समय पड़ा रहे ताकि स्वाद अउरी पूरा हो जाए। सही सूखा भंडारण में शी रू सालन तक टिक सकेला, “पुरान चट्टानी चाय” (陈岩茶, chén yánchá) में बदल जाला; कबो-कबो स्थिरता खातिर दोबारा हल्का भुनाई कइल जाला। अइसन चाय के मुख्य दुश्मन — नमी, एहसे पैकेजिंग के हवाबंद होखल बहुते जरूरी बा।

11. दाम आ नकली:

  • दाम के दायरा: बहुत बिस्तृत; अनुमानित रूप से 200–600 युआन प्रति 500 ग्राम बाहरी आ आधा-चट्टानी भूखंड के कच्चा माल खातिर से कई हजार युआन प्रति 500 ग्राम आ ओकरा से ढेर सच्चा-चट्टानी (zhèngyán) चाय खातिर
  • टेरुआर कारक: उत्पत्ति क्षेत्र किसिम के नाम से बेसी दाम पर असर डालेला

शी रू — सभसे ढेर प्रचारित míngcóng नइखे, एहसे एकर दाम औसत रूप से प्रसिद्ध घाटी के तेजी वाला रोउगुई से शांत बाड़ें, लेकिन असली zhèngyán-शी रू फिर भी महंगा आ अपेक्षाकृत दुर्लभ बा। बजार के सामान्य समस्या:

  • जलोढ़ आ बाहरी भूखंड (洲茶/外山) के कच्चा माल सच्चा-चट्टानी के नाम पर बेचल जाला;
  • बेसी भुनाई कमजोर भा फीका कच्चा माल के छिपावेला;
  • शी रू के नाम पर अकसर बेनाम मिलावट भा दूसर míngcóng बेच दिहल जाला।

जाँच खातिर दिशानिर्देश: असली चट्टानी चाय टिकाऊ खनिज बाद के स्वाद देवेला, कई गो काढ़ा पर टिकेला आ धीरे-धीरे “खाली” होला; कोइला भुनाई के शुद्धता जीवित मिठास आ खनिजता के पूरा तरीका से ना दबा देवे के चाहीं। “तीन घाटी आ दू गो जलधारा” क्षेत्र से बतावल उत्पत्ति पर संदेहास्पद रूप से कम दाम लगभग हमेशा बेमेल के ओर इशारा करेला। खूबसूरत पैकेजिंग नाम से ढेर बिस्वास मालिक आ बिक्रेता के प्रतिष्ठा पर कइल बेहतर बा।

12. रोचक तथ्य:

  • नाम के अर्थ: “पाथर के दूध” एक साथ चट्टान के खनिजता आ पेय के कोमल, “दूधिया” बनावट के ओर इशारा करेला
  • नाम के प्राचीनता: शी रू नाम सोंग दस्तावेजन में “सफेद दूध” (白乳, bái rǔ) के साथे दान चाय खातिर दर्ज बा
  • दुर्लभता: आजु ई एगो खास बिसेस míngcóng बा, बड़ पैमाना के शुइशियान आ रोउगुई से उलट, छोट मात्रा में उत्पादित
  • सांस्कृतिक सेतु के रूप में नाम: आधुनिक ऊलोंग आ सोंग दबावल चाय तकनीकी रूप से अलग-अलग बाड़ी सऽ, लेकिन संरक्षित नाम से जुड़ल बाड़ी सऽ

समापन में:

शी रू — एगो अइसन किसिम ह जेमें प्राचीन नाम आ आधुनिक तकनीक के संयोग सभसे दिलचस्प बा। दान चाय के रूप में ई सोंग युग में मौजूद रहे, लेकिन वर्तमान शी रू — पत्ता के घुमा के प्रोसेसिंग आ कोइला भुनाई वाला पूरा वूयीशान चट्टानी ऊलोंग ह, जेकर कीमत मुख्य रूप से वूयी परबत के टेरुआर आ भुनाई के कारीगरी से तय होला। एकर “मलाईदार” कोमलता आ खनिज गहराई एकरा míngcóng समूह के एगो अभिव्यंजक प्रतिनिधि बनावेला, हालाँकि प्रमुख किसिमन के तुलना में ई आम जनता खातिर कम जानल-मानल बा।

जे लोग चट्टानी चाय के अध्ययन करेलें, शी रू पूरा श्रेणी के तर्क समझे के एगो बढ़िया मौका बा: उत्पत्ति क्षेत्र के महत्व जोरदार नाम से ढेर होला, भुनाई के स्तर शैली तय करेला, आ असलियत लेबल से ना, बलुक पेय के टिकाऊपन आ “चट्टानी बाद के स्वाद” के चरित्र से जाँचल जाला। एकरा शांत तरीका से, चाय बनावे के बिबरण पर ध्यान से, आ उत्पत्ति के बजारी दावा के प्रति संयमित नजरिया से लिहल जाए के चाहीं।

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